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“2026 में अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इजराइल का इतिहास, भूगोल, फिलिस्तीन विवाद और ईरान तनाव का पूरा विश्लेषण।”

India Ahead Now | Updated on: March 3, 2026 | 3:55 pm
इजराइल (Israel) एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण देश है जो पश्चिम एशिया (West Asia) में स्थित है। यह दक्षिणी लेवांत क्षेत्र में आता है, जिसे ऐतिहासिक रूप से कनान, इजराइल की भूमि और पवित्र भूमि (Holy Land) के नाम से जाना जाता है। इजराइल की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह तीन महाद्वीपों—एशिया, अफ्रीका और यूरोप—के जंक्शन पर स्थित है।
इजराइल की भूगोल और सीमाएं (Geography and Borders of Israel)

इजराइल की कुल क्षेत्रफल लगभग 22,000 वर्ग किलोमीटर है (पूर्व-1967 सीमाओं के अनुसार लगभग 20,770 वर्ग किमी)। यह अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के आकार के बराबर है। देश की सीमाएं इस प्रकार हैं:

  • उत्तर: लेबनान (Lebanon)
  • उत्तर-पूर्व: सीरिया (Syria)
  • पूर्व: जॉर्डन (Jordan) और वेस्ट बैंक (West Bank)
  • दक्षिण-पश्चिम: मिस्र (Egypt) और गाजा पट्टी (Gaza Strip)
  • पश्चिम: भूमध्य सागर (Mediterranean Sea)
  • दक्षिण: लाल सागर (Red Sea) 

देश में विविध भू-आकृतियां हैं—उत्तरी हाइलैंड्स, मध्य में पहाड़ियां, दक्षिण में नेगेव रेगिस्तान (Negev Desert), और पूर्व में ग्रेट रिफ्ट वैली।

तेल अवीव (Tel Aviv) आर्थिक और तकनीकी हब है, जबकि यरूशलेम (Jerusalem) को इजराइल ने अपनी राजधानी घोषित किया है, हालांकि पूर्वी यरूशलेम पर इसकी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता नहीं मिली है।
इजराइल की भाषाएं और सांस्कृतिक महत्व (Languages and Cultural Significance)
इजराइल की एकमात्र आधिकारिक भाषा हिब्रू (Hebrew) है। 2018 तक अरबी भी आधिकारिक भाषा थी, लेकिन अब यह विशेष दर्जा वाली भाषा है। देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं, जैसे अंग्रेजी, रूसी, अम्हारिक और फ्रेंच।इजराइल पवित्र भूमि का बड़ा हिस्सा है, जो यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम, सामरीवाद, ड्रुज और बहाई जैसे इब्राहीमिक धर्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यरूशलेम में अल-अक्सा मस्जिद, चर्च ऑफ होली सेपुलचर और वेस्टर्न वॉल जैसे पवित्र स्थल हैं।
इजराइल का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of Israel)
इजराइल का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व में, नव-असीरियन और नव-बेबीलोनियन साम्राज्यों के समय इजराइली और यहूदी साम्राज्य उभरे थे।
आधुनिक इजराइल राज्य की स्थापना 14 मई 1948 को हुई, जब डेविड बेन-गुरियन ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
स्वतंत्रता के तुरंत बाद, इजराइल को पांच अरब पड़ोसी देशों (मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक) से हमले का सामना करना पड़ा, जो 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के रूप में जाना जाता है। यह संघर्ष इजराइल-फिलिस्तीन विवाद (Israel-Palestine Conflict) का आधार बना, जो आज भी जारी है।
इजराइल-ईरान तनाव और 28 फरवरी 2026 का हमला (Israel-Iran Tensions and the February 28, 2026 Attack)
इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से गहरा वैचारिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद हैं। इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है, जबकि ईरान इजराइल की नीतियों की कड़ी आलोचना करता है और इसे “ज़ायनिस्ट इकाई” कहकर चुनौती देता है।अमेरिका, इजराइल का प्रमुख सहयोगी, ईरान पर प्रतिबंध और कूटनीतिक दबाव की नीति अपनाता रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू किए। यह ऑपरेशन “Operation Epic Fury” (अमेरिका) और “Operation Roaring Lion” (इजराइल) के नाम से जाना गया।हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई उच्च अधिकारी मारे गए। लक्ष्य ईरान के परमाणु सुविधाओं, मिसाइल साइट्स, IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) और नेतृत्व को निशाना बनाना था, जिसका उद्देश्य रेजीम चेंज (regime change) बताया गया।ईरान ने जवाबी हमले किए—बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन से इजराइल, अमेरिकी बेस और गल्फ देशों (UAE, सऊदी अरब, कुवैत) पर हमले। संघर्ष लेबनान तक फैल गया, जहां हिजबुल्लाह ने इजराइल पर रॉकेट दागे। 3 मार्च 2026 तक मौतों की संख्या ईरान में 700+ पहुंच गई, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर भी नुकसान हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों को जारी रखने की बात कही, जिसमें मिसाइल क्षमता, नौसेना और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को खत्म करना शामिल है।यह घटना मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर ले गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। Strait of Hormuz बंद होने की खबरों से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ।
इजराइल एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां तकनीकी नवाचार (स्टार्टअप नेशन), रक्षा उद्योग और विविध संस्कृति प्रमुख हैं। लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष, फिलिस्तीन मुद्दा और अब ईरान के साथ यह नया मोर्चा भविष्य को अनिश्चित बनाता है