गिरल लिग्नाइट माइंस विवाद में विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्ट्रेट पर पेट्रोल छिड़ककर की आत्मदाह की कोशिश
राजस्थान के बाड़मेर जिले के गिरल (शिव) लिग्नाइट माइंस में श्रमिक शोषण के खिलाफ पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आज जिला कलेक्ट्रेट के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़क दिया। प्रशासन की उदासीनता और राज्य सरकार की चुप्पी के खिलाफ यह उनका आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन था।
भावुक होते हुए भाटी ने कहा, “यह लोकतंत्र है या तानाशाही? यदि मारना ही है तो मुझे मारो, इन मजदूरों को क्यों मारते हो? इनका कसूर क्या है?”
उन्होंने चेतावनी दी, “यदि श्रमिकों को मरने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो उससे पहले मैं अपनी जान दे दूँगा, ताकि सत्ता में बैठे लोग जागें और मजदूरों की चीखें सुन सकें।”
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आंदोलन की पृष्ठभूमि
गिरल लिग्नाइट परियोजना में स्थानीय श्रमिकों के शोषण, पर्यावरणीय अनियमितताओं और स्थानीय लोगों की अनदेखी के खिलाफ पिछले 35 दिनों से शांतिपूर्ण धरना चल रहा है। विधायक भाटी पिछले 15 दिनों से खुद धरने पर डटे हुए हैं, लेकिन जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।
मुख्य सचिव को लिखा पत्र: 22 सूत्री मांगें
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने मजदूरों और प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांगें रखीं:
- 8 घंटे का कार्य समय: वर्तमान में 12 घंटे काम करवाया जा रहा है, लेकिन वेतन केवल 8 घंटे का दिया जा रहा है। श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- उचित वेतन: हाई स्किल चालकों और ऑपरेटरों को उनकी योग्यता के अनुसार वेतन।
- किसानों की भूमि: बिना मुआवजे के डंपिंग यार्ड के रूप में उपयोग बंद किया जाए या मुआवजा + ब्याज दिया जाए।
- रात्रि प्रकाश व्यवस्था: 24 घंटे खनन के बावजूद रात में रोशनी नहीं।
- पौधारोपण में भ्रष्टाचार: 1995 से अब तक की जांच।
- सुरक्षा फेंसिंग: माइंस क्षेत्र के चारों ओर तारबंदी।
- CSR फंड: शिक्षा, स्वास्थ्य और गांवों के विकास में सही उपयोग।
- सुरक्षा उपकरण: आईडी कार्ड, वीटीसी, पे-स्लिप और सुरक्षा गियर उपलब्ध कराए जाएं।
- स्वास्थ्य जांच: प्रभावितों का नियमित चिकित्सकीय परीक्षण।
- स्थानीय रोजगार: स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता।
- भूमि मुआवजा: थूबली, जालीला आदि गांवों में बकाया मुआवजा।
- मंदिर और जल स्रोत: आईनाथ माता मंदिर के पास सुधार।
- सड़क निर्माण: धूम्बली-गिरल डामर सड़क।
- पुनर्वास: खनन पूर्ण क्षेत्रों में बैंक फिलिंग और पौधारोपण।
विधायक का आग्रह: उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और मजदूरों की जायज मांगों का तत्काल समाधान।
क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। मजदूरों का कहना है कि शोषण की सीमा पार हो चुकी है। पर्यावरणीय क्षति, स्वास्थ्य समस्याएं और बेरोजगारी बढ़ रही है, जबकि कंपनी और ठेकेदार नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। विधायक भाटी के इस कदम के बाद अब पूरे देश में सियासी तापमान बढ़ गया है। यह आंदोलन अब केवल मजदूरों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का जनआक्रोश बन चुका है।