बुधवार को FWICE की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि फिल्म इंडस्ट्री में एकता, सहयोग और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से इस Bollywood Controversy को बातचीत और आपसी समझदारी के जरिए सुलझाने का निर्णय लिया गया।

FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रणवीर सिंह पर कभी भी किसी प्रकार का बैन नहीं लगाया गया था। उन्होंने कहा कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को बैन के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता यह नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह पूरी Bollywood Controversy नॉन-कोऑपरेशन से जुड़ी थी, न कि किसी आधिकारिक प्रतिबंध से।
अशोक पंडित ने आगे कहा कि FWICE के पास किसी कलाकार या तकनीशियन को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल अपने सदस्यों को यह सलाह दे सकता है कि वे किसी विशेष व्यक्ति या प्रोजेक्ट के साथ सहयोग करें या न करें। उन्होंने इसे एक लोकतांत्रिक अधिकार बताया और कहा कि किसी भी Bollywood Controversy को संवाद के माध्यम से सुलझाना ही सबसे बेहतर रास्ता है।
गौरतलब है कि FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। इस आदेश के तहत संगठन ने अपने सभी सदस्यों से अभिनेता के किसी भी प्रोजेक्ट में काम न करने की अपील की थी। इसके बाद यह मामला एक बड़ी Bollywood Controversy के रूप में सामने आया और पूरे फिल्म जगत में चर्चा का विषय बन गया।
जानकारी के अनुसार यह विवाद फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा हुआ था। फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट इस फिल्म का निर्माण कर रही है। आरोप था कि फिल्म की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और शूटिंग शुरू होने में केवल तीन सप्ताह का समय बचा था, तभी रणवीर सिंह ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला कर लिया। इसी वजह से यह Bollywood Controversy और अधिक गहरा गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोजेक्ट से बाहर होने के कारण निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। मेकर्स ने कथित तौर पर रणवीर सिंह से 45 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की। इस घटनाक्रम ने इंडस्ट्री में अनुबंधों और पेशेवर प्रतिबद्धताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी और यह Bollywood Controversy लगातार सुर्खियों में बनी रही।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि रणवीर सिंह ने FWICE को एक लीगल नोटिस भेजा था। बताया गया कि अभिनेता ने संगठन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखा। हालांकि इस संबंध में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके बावजूद यह मामला एक चर्चित Bollywood Controversy के रूप में देखा गया।
इस पूरे विवाद के बीच प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी चिंता जाहिर की। गिल्ड ने कहा कि हाल के वर्षों में कई अभिनेता, निर्देशक और तकनीशियन शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले अपने कमिटमेंट से पीछे हट रहे हैं। इससे निर्माताओं को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। गिल्ड का मानना है कि ऐसी घटनाएं फिल्म उद्योग में अनिश्चितता बढ़ाती हैं और नई Bollywood Controversy को जन्म देती हैं।
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने अपने बयान में कहा कि उसे एक्सेल एंटरटेनमेंट और पैनोरमा स्टूडियोज सहित कई सदस्यों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों में दावा किया गया कि अंतिम समय में किए गए बदलावों के कारण फिल्मों की योजना और बजट प्रभावित हुए। गिल्ड के अनुसार, इस तरह की Bollywood Controversy केवल निर्माताओं को ही नहीं बल्कि सैकड़ों तकनीशियनों और क्रू मेंबर्स को भी प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ती पेशेवर चुनौतियों के बीच सभी पक्षों को अनुबंधों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए। साथ ही किसी भी Bollywood Controversy को अदालत या सार्वजनिक विवाद की बजाय बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए।
फिलहाल FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव वापस लिए जाने के बाद रणवीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। माना जा रहा है कि इस फैसले से फिल्म इंडस्ट्री में सकारात्मक संदेश जाएगा और हालिया Bollywood Controversy का शांतिपूर्ण समाधान निकलने की संभावना बढ़ेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि रणवीर सिंह, FWICE और संबंधित निर्माता आगे किस तरह इस मामले को पूरी तरह समाप्त करते हैं।
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