असम में कांग्रेस की एक और मुसीबत! विधायक का टिकट कटवाने के लिए सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने खोला मोर्चा
नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) में आंतरिक कलह एक बार फिर सिर उठा रही है। राज्य की सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस अब अपने ही वरिष्ठ नेता और नागांव से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के गुस्से का सामना कर रही है। बोरदोलोई ने पार्टी के असम प्रभारी और एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर लहरीघाट विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर को टिकट न देने की मांग की है। उन्होंने आसिफ नजर को “अपराधी” का संरक्षक बताते हुए इसे अपनी “अपमान” करार दिया है।यह विवाद तब और गहरा गया जब बोरदोलोई ने खुले तौर पर कहा कि यदि पार्टी उनकी मांग नहीं मानती है, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। हालांकि, उन्होंने इस्तीफा देने की सीधी धमकी नहीं दी, लेकिन उनके शब्दों में स्पष्ट असंतोष झलक रहा है। यह घटना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि पार्टी पहले ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने जैसी घटनाओं से जूझ रही है।
विवाद की जड़: पुराना हमला और संरक्षण का आरोप
पर्दे के पीछे का पूरा मामला अप्रैल 2025 में नागांव जिले के ढिंग इलाके में सांसद प्रद्युत बोरदोलोई पर हुए हमले से जुड़ा है। असम पुलिस की सुस्पष्ट जांच में एमदादुल इस्लाम नामक व्यक्ति को हमले का मुख्य आरोपी पाया गया, जिसे गिरफ्तार किया गया और चार्जशीट दाखिल की गई। बोरदोलोई का आरोप है कि एमदादुल इस्लाम लहरीघाट विधायक आसिफ नजर का बेहद करीबी है।जमानत पर रिहा होने के बाद एमदादुल का “हीरो की तरह स्वागत” किया गया, जिसका आयोजन कथित तौर पर आसिफ नजर ने करवाया। इसके बाद एमदादुल को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) अध्यक्ष गौरव गोगोई से मिलवाया गया। बोरदोलोई ने इसे अपना “अपमान” बताया और कहा कि यह पार्टी में सांठगांठ का प्रमाण है।अपने पत्र में बोरदोलोई ने लिखा है कि वे “दर्द और पीड़ा” महसूस कर रहे हैं। उन्होंने गौरव गोगोई और स्क्रीनिंग कमिटी के सदस्य इमरान मसूद पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा, जिन्हें उन्होंने इस मामले में आसिफ नजर का साथ देने का दोषी ठहराया। बोरदोलोई ने कहा, “एक अपराधी को टिकट कैसे दिया जा सकता है? यह पार्टी की छवि और मेरे जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ अन्याय है।”
कांग्रेस का टिकट वितरण: लहरीघाट सीट अभी लंबित
कांग्रेस ने असम की 126 में से 65 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। हाल ही में जारी दूसरी सूची में 23 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए। हालांकि, लहरीघाट सीट पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। यह सीट मुस्लिम बहुल इलाके में आती है और पार्टी यहां मजबूत आधार बनाए रखना चाहती है। आसिफ नजर को गौरव गोगोई और सांसद रकीबुल हुसैन का करीबी माना जाता है, जो उन्हें टिकट दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।स्क्रीनिंग कमिटी की अगुवाई प्रियंका गांधी वाड्रा कर रही हैं। बोरदोलोई का दावा है कि यह मामला प्रियंका गांधी के संज्ञान में भी है। पार्टी अगले एक-दो दिनों में बची हुई सीटों पर फैसला लेने वाली है। यदि आसिफ नजर को टिकट मिलता है, तो बोरदोलोई के असंतोष से पार्टी में बड़ा विद्रोह भड़क सकता है।
प्रद्युत बोरदोलोई: कांग्रेस के डीएनए में बसे नेता
प्रद्युत बोरदोलोई असम कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। वे 16 साल की उम्र से कांग्रेस के साथ जुड़े हैं। चार बार विधायक रह चुके हैं और तरुण गोगोई सरकार में 15 साल मंत्री रहे। नागांव से लगातार दो बार सांसद चुने गए। उनका बेटा प्रतीक बोरदोलोई को मार्घेरिटा सीट से टिकट दिया गया है, जो पार्टी में उनके प्रभाव को दर्शाता है।बोरदोलोई ने कहा, “कांग्रेस मेरे डीएनए में है। मैंने हमेशा असम की जनता के लिए काम किया है। लेकिन ऐसी सांठगांठ बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने आलाकमान पर भरोसा जताया, लेकिन स्पष्ट किया कि वे अपने भविष्य की तरह देख रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव और बीजेपी की प्रतिक्रिया
यह विवाद कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले बड़ा संकट है। असम में पार्टी पिछले 10 साल से सत्ता से बाहर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह उनकी पुरानी भविष्यवाणी को सही साबित करता है कि बोरदोलोई ज्यादा दिन कांग्रेस में नहीं रहेंगे। बीजेपी इसे कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रही है।असम विधानसभा चुनाव एक चरण में 9 अप्रैल 2026 को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के तहत अन्य दलों से सीट शेयरिंग में भी चुनौतियां हैं। यदि बोरदोलोई जैसे नेता बगावत करते हैं, तो पार्टी की सीटें प्रभावित हो सकती हैं, खासकर नागांव और आसपास के इलाकों में।
पार्टी के लिए परीक्षा की घड़ी
यह मामला कांग्रेस हाईकमान के लिए बड़ी परीक्षा है। क्या वे बोरदोलोई के दबाव में आसिफ नजर का टिकट काटेंगे? या गौरव गोगोई गुट को मजबूत रखने के लिए आसिफ को मौका देंगे? यदि टिकट कटता है, तो गौरव गोगोई और उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ सकती है। वहीं, यदि नहीं कटता, तो बोरदोलोई का रुख क्या होगा? क्या वे पार्टी छोड़ेंगे या चुप रहेंगे?असम कांग्रेस में यह आंतरिक संघर्ष पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। चुनाव नजदीक आते ही ऐसे विवाद पार्टी की संभावनाओं को कमजोर कर सकते हैं। देखना होगा कि हाईकमान इस मुसीबत को कैसे संभालता है और क्या असम में कांग्रेस फिर से मजबूत हो पाएगी या नहीं।