प्रसिद्ध भजन गायिका साध्वी श्री पूर्णिमा दीदी का संगीतमय भजन रस प्रवाह कार्यक्रम होगा आयोजित| गोपालन निदेशालय, राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वाधान में गो- परिक्रमा, गोमाता पूजन, रक्षासूत्र बंधन एवं गोरक्षा संकल्प, इच्छापूरक परमसिद्धा ‘कामधेनु गोमाता’ के दिव्य दर्शन कार्यक्रम होंगे आयोजित
डीग। 29 अक्टूबर, बुधवार को गोपाष्टमी का पर्व पुण्यभूमि राजस्थान की पावन धरा श्री कृष्ण-बलराम की नित्य गोचारण स्थली श्रीजड़खोर गोधाम में धूमधाम से भक्तिमय माहौल के बीच मनाया जाएगा। आयोजन के दौरान एकसाथ रिकॉर्ड 10 हजार से अधिक गोवंश की एक साथ पूजा अर्चना और परिक्रमा की जाएगी। स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज की प्रेरणा से गोपालन निदेशालय, राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वाधान में यह महोत्सव आयोजित हो रहा है जिसका मकसद गोरक्षा, गो-संरक्षण गो-संवर्धन को बढ़ावा देना और जन जागरूकता का प्रसार करना है। इस कार्यक्रम के जरिए गोपाष्टमी के पावन पर्व में निहित गोमाता के कल्याण के संदेश को गोपालकों और आमजन के मन में जागृत करने का संकल्प लिया जाएगा। इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढ़म, पुलिस महानिरीक्षक, भरतपुर रेंज श्री कैलाश चंद बिश्नोई, जिला कलेक्टर डीग श्री उत्सव कौशल और गोपालन निदेशालय के निदेशक श्री पंकज ओझा शामिल होंगे। गोपाष्टमी के अवसर पर स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज की प्रेरणा से इस अदभुत कार्यक्रम की शुरुआत कामधेनु गोमाता सुरभि के दर्शन कर गोधाम में आश्रित हजारों गौमाताओं की परिक्रमा से होगी। इसी के साथ गोमाता पूजन, रक्षासूत्र बंधन एवं गोरक्षा संकल्प कार्यक्रम भी आयोजित होगा। इसके पश्चात सुप्रसिद्ध भजन गायिका साध्वी श्री पूर्णिमा दीदी का संगीतमय भजन रस प्रवाह कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसके बाद प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन होगा।
गोपाष्टमी के पावन पर्व पर इस भव्य महोत्सव में सम्मलित होने राजस्थान के साथ अन्य प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गोभक्त आ रहे हैं। गौरतलब है कि बृज मंडल की पावन धरा पर राजस्थान के डीग स्थित श्रीजड़खोर गोधाम में हजारों निराश्रित गौमाताओं के लिए कल्याणकारी आश्रम बना है। यहां इन गौमाताओं के लिए चिकित्सालय भी है जो आस पास के गोपालकों के लिए भी वरदान बना है। गोपालक यहां गौमाताओं के पालन का उचित मार्गदर्शन भी प्राप्त करते हैं जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता और आय बढ़ी है।