शशि थरूर ने लांघी ‘लक्ष्मण रेखा’, कांग्रेस ने सुनाई खरी-खरी, भारत-पाक सीजफायर पर मचा बवाल
नई दिल्ली, 16 मई 2025: भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के बाद शुरू हुआ सियासी घमासान अब कांग्रेस पार्टी के भीतर भी तूल पकड़ चुका है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के हालिया बयानों ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) की बुधवार को हुई बैठक में थरूर के बयानों पर तीखी नाराजगी जाहिर की गई। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बार शशि थरूर ने “लक्ष्मण रेखा लांघ दी है।”
थरूर के बयानों से क्यों नाराज है कांग्रेस?
भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति बनी थी, जिसके बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। लेकिन, इस बीच शशि थरूर ने न केवल सीजफायर के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की बात को भी खारिज कर दिया। थरूर ने 12 मई को X पर एक पोस्ट में ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा था, “ट्रंप का भारत और पाकिस्तान को एक तराजू में तौलने का प्रयास स्तब्ध करने वाला है। भारत आतंकवाद का शिकार है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक है।”
थरूर के इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी लाइन से अलग माना। CWC की बैठक में बिना नाम लिए संदेश दिया गया कि यह समय व्यक्तिगत राय देने का नहीं, बल्कि पार्टी के आधिकारिक रुख को एकजुट होकर देश तक पहुंचाने का है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान ने सभी नेताओं को हिदायत दी है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी निजी राय व्यक्त करने से बचें।
पहलगाम हमले से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से शुरू हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। 10 मई को दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति बनी, जिसके पीछे पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) के साथ बातचीत को कारण बताया गया
इस सहमति की घोषणा के बाद जहां कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला, वहीं थरूर ने न केवल ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की, बल्कि सीजफायर को भी जरूरी बताया। थरूर ने 8 मई को कहा था, “ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश है। भारत ने 26 बेकसूर नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक कार्रवाई की।”
CWC बैठक में गर्माया मुद्दा
CWC की बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट और शशि थरूर सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक में थरूर के बयानों पर तीखी बहस हुई। एक नेता ने थरूर से सवाल किया कि उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बयान क्यों दिए। जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पार्टी का संदेश स्पष्ट और एकजुट होना चाहिए।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, थरूर के बयानों से कांग्रेस का आधिकारिक रुख कमजोर पड़ रहा है, जिससे नेतृत्व चिंतित है। यह पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस की तीसरी बड़ी बैठक थी
थरूर का जवाब: “मैं देश के लिए बोलता हूं”
जब थरूर से इस विवाद पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मैंने एक भारतीय के रूप में अपनी बात रखी। यह राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा था। पार्टी की ओर से मुझे कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला, मैं केवल मीडिया रिपोर्ट्स देख रहा हूं।” थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वे देश के हित में बोल रहे हैं, न कि किसी व्यक्तिगत एजेंडे के तहत।
सियासी हलकों में चर्चा तेज
थरूर के बयानों ने न केवल कांग्रेस के भीतर हलचल मचाई है, बल्कि सियासी हलकों में भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। कुछ लोग थरूर के बयानों को राष्ट्रहित में सही ठहरा रहे हैं, जबकि अन्य इसे पार्टी अनुशासन का उल्लंघन मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी थरूर के बयान वायरल हो रहे हैं, और कई यूजर्स उन्हें “मोदी सरकार का कवच” तक कह रहे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व अब इस मुद्दे पर सख्ती बरतने के मूड में है। सूत्रों का कहना है कि थरूर को भविष्य में पार्टी लाइन का पालन करने की सख्त हिदायत दी जा सकती है। वहीं, भारत-पाक सीजफायर और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सियासी बहस अभी और तेज होने की संभावना है।