जयपुर (ऋतुश्री पथरिया)| आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में नींद की अनदेखी आम हो चुकी है, लेकिन हालिया रिसर्च ने इसके खतरनाक नतीजों पर रोशनी डाली है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की लगातार कमी दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना सकती है और डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। जो लोग हर रात 6 घंटे से कम सोते हैं, उनके मस्तिष्क में क्रोनिक इंफ्लेमेशन (दीर्घकालिक सूजन) की आशंका बढ़ जाती है। यह सूजन न सिर्फ दिमागी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि याददाश्त, एकाग्रता और सोचने की क्षमता को भी धीरे-धीरे प्रभावित अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया जैसी स्थितियों के विकसित होने की संभावना दोगुनी हो सकती है।
नींद की कमी सबसे बड़ा कारण
आपकी नींद का सीधा संबंध मस्तिष्क की मरम्मत प्रक्रिया से होता है। नींद के दौरान दिमाग खुद को डिटॉक्स करता है और नई यादों को मजबूत बनाता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो न्यूरॉन्स कमजोर होने लगते हैं, जिससे दिमाग का ‘एजिंग प्रोसेस’ तेज हो जाता है।
रिसर्च में क्या आया सामने
दिमाग के बुढ़ापे को लेकर की गई रिसर्च में 27,000 से ज्यादा लोगों की जांच की गई और उनके ब्रेन स्कैन के माध्यम से दिमाग की उम्र का अनुमान लगाया गया. इस रिसर्च में ऐसे लोग जो न तो कम नींद लेते हैं और नहीं पूरी नींद लेते हैं, उनका दिमाग उनकी वास्तविक उम्र से लगभग 0.6 साल बड़ा पाया गया. वहीं ऐसे लोग जो कभी पूरी नींद नहीं लेते उनका दिमाग उनकी वास्तविक उम्र से 1 साल ज्यादा बूढ़ा पाया गया.
एक्सपर्ट्स की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक वयस्क को रोज़ाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए। अच्छी नींद न सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखती है, बल्कि भविष्य में होने वाली मानसिक बीमारियों से भी बचाव करती है।
अगर आप भी बार-बार नींद को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। आज से ही अपनी नींद को प्राथमिकता दें और एक स्वस्थ, तेज और जवान दिमाग के लिए पर्याप्त आराम करें।