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करवा चौथ से पहले जानिए सरगी की परंपरा, शुभ मुहूर्त और जरूरी बातें

India Ahead Now | Updated on: October 9, 2025 | 1:12 pm

जयपुर (ऋतुश्री पथरिया)| 10 अक्टूबर को रखा जाएगा सुहागिनों का पावन व्रत, जानें कब और कैसे करें सरगी का सेवन

देशभर में 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को करवा चौथ का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि इस दिन वे अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पहले ‘सरगी’ खाकर होती है, जो सास अपनी बहू को प्रेम और आशीर्वाद स्वरूप देती है।

सरगी क्या है?
सरगी करवा चौथ व्रत की सबसे पहली और महत्वपूर्ण विधि है। यह सुबह सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला विशेष भोजन होता है, जो सास अपनी बहू को देती है। व्रती सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करती है और फिर सरगी करके व्रत का संकल्प लेती है।

सरगी का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ के दिन सरगी सूर्योदय से पहले खानी चाहिए. इस साल सरगी का शुभ समय प्रातः 4:30 से 5:45 बजे तक रहेगा। इस समय के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि सूर्योदय के साथ ही व्रत का आरंभ माना जाता है।

सरगी में क्या-क्या शामिल करें
सरगी में फलों, मिठाई, सूखे मेवे, पराठे, दही, हलवा और नारियल का पानी जैसे पौष्टिक व हल्के खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। परंपरानुसार सास अपनी बहू को 16 श्रृंगार की वस्तुएं और सरगी देती हैं.
सरगी करने की विधि

सरगी से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें। भोजन को थाली में लगाकर श्रद्धा से ग्रहण करें। इसके बाद दिनभर निर्जला व्रत रखकर चंद्रोदय के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलें।

इस प्रकार श्रद्धा, विश्वास और प्रेम से की गई सरगी और करवा चौथ का व्रत वैवाहिक जीवन मंद सौभाग्य और समृद्धि लाता है।