जयपुर (ज्योति मामनानी)| करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा ज्ञान और आध्यात्मिक परिपूर्णता के लिए करते हैं। उनके अनुसार, ब्रह्मा (ज्ञान के चंद्रमा) का पालन करके और उन पर पूर्ण विश्वास रखकर ही व्रत को पूरा किया जा सकता है, जैसे कि वीरावती के भाइयों ने उसे चंद्रमा की नकल करके विचलित किया था। चंद्रमा पूजा के माध्यम से इस बात पर जोर दिया जाता है कि आध्यात्मिक मार्ग से विचलित हम न हो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।
करवा चौथ 2025:शुभ मुहूर्त
सूत्रों के अनुसार करवा चौथ पर पूजा का शुभ समय शाम 05:57 बजे से शाम 07:11 बजे तक का है. यह अवधि कुल 1 घंटे 14 मिनट की होगी ।
मानयताओं के अनुसार, “करवा चौथ के व्रत को पति-पत्नी के बीच वर्तमान संबंध को अच्छे रखने का प्रतीक माना जाता है।” इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम सभी मानवीय मूल्यों और रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देख रहे हैं। पति-पत्नी के बीच प्यार, देखभाल, समझ और विश्वास खत्म हो रहा है। वे अक्सर लंबे समय तक रिश्ते नहीं निभा पाते। बहुत जल्द, उनके व्यक्तित्व में अंतर के कारण समस्याएँ पैदा हो जाती हैं। उनमें सामंजस्य बिठाने, सहन करने और बिना शर्त प्यार करने की क्षमता का अभाव होता है। यही कारण है कि वे एक साथ शांतिपूर्ण जीवन नहीं जी पाते और छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने लगते हैं। ये झगड़े बेवफाई, घरेलू हिंसा, तलाक आदि का कारण बनते हैं। लेकिन मानयताएं यह भी है की अगर दोनों कपल आध्यात्मिक सोच के साथ एक साथ रहे तो उनका जीवन खुशियों से भरा रहता है ।
वीरावती की कहानी का संदेश…
वीरावती की कहानी करवा चौथ व्रत से जुड़ी है, जिसमें वह सात भाइयों की इकलौती बहन थी और पहली बार करवा चौथ का व्रत रखती है. भूख-प्यास से व्याकुल वीरावती के भाइयों ने छल से दीपक की रोशनी दिखाकर चंद्रमा बताकर व्रत तुड़वा दिया. व्रत तोड़ते ही उसके पति की मृत्यु का समाचार मिला.लेकिन वीरावती को भगवान पर पूण विश्वास था जिनकी शक्तिया पाकर वीरवती ने अपने पति को मृत्यु से बचाया। वीरावती ने व्रत रखकर और तपस्या से वो शक्तिया प्राप्त की थी । मान्यताओं के अनुसार असली व्रत तो भगवान के प्रति निष्ठावान और वफ़ादार रहने का व्रत लेना है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान अर्जुन को सभी रिश्ते-नाते और सांसारिक विषयों को भूलकर केवल उनका स्मरण करने का उपदेश दिया गया था।