नई दिल्ली, 16 मई 2025: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपने शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह कदम जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बाद भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा तुर्की के साथ शैक्षणिक संबंधों को खत्म करने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
आईआईटी रुड़की का आधिकारिक बयान
आईआईटी रुड़की ने अपने बयान में कहा, “संस्थान देश के साथ खड़ा है और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानता है। इसलिए, तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ शैक्षणिक समझौता तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा रहा है।” संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ऐसी साझेदारियां भारत के रिसर्च और इनोवेशन लक्ष्यों के अनुरूप होनी चाहिए। रद्द किए गए एमओयू में छात्र और फैकल्टी आदान-प्रदान के साथ-साथ शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग की शर्तें शामिल थीं।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने भी तोड़े संबंध
आईआईटी रुड़की के अलावा, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने भी तुर्की और अजरबैजान के संस्थानों के साथ अपने सभी छह शैक्षणिक समझौतों को समाप्त कर दिया। एलपीयू ने हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव में इन देशों द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने का हवाला दिया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
जेएनयू और जामिया की पहल
इससे पहले, जेएनयू ने इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपने एमओयू को निलंबित कर दिया था, जिसमें फरवरी 2025 में तीन साल के लिए सांस्कृतिक अनुसंधान और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया था। जेएनयू ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से यह समझौता अगली सूचना तक निलंबित है। जेएनयू राष्ट्र के साथ खड़ा है।”
इसी तरह, जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने भी तुर्की सरकार से संबद्ध सभी संस्थानों के साथ अपने शैक्षणिक समझौतों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत-पाक तनाव का प्रभाव
ये निर्णय भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव और तुर्की द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देने की वजह से लिए गए हैं। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन द्वारा पाकिस्तान के समर्थन में दिए गए बयानों और कथित सैन्य सहायता, जिसमें भारत के खिलाफ ड्रोन हमलों में सहयोग शामिल है, ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय विश्वविद्यालय तुर्की और अजरबैजान के साथ अपने शैक्षणिक संबंधों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
विश्वविद्यालयों का एकजुट संदेश
आईआईटी रुड़की, जेएनयू, जामिया और एलपीयू जैसे प्रमुख संस्थानों का यह कदम भारतीय शैक्षणिक समुदाय के राष्ट्रीय हितों के प्रति एकजुटता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में रणनीतिक बदलाव का संकेत है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
आगे की राह
आईआईटी रुड़की ने स्पष्ट किया कि वह उन वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देना जारी रखेगा जो भारत के शैक्षणिक और अनुसंधान उद्देश्यों के अनुरूप हों। अन्य विश्वविद्यालय भी इसी तरह की नीति अपना रहे हैं, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है।
यह घटनाक्रम न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में बल्कि भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रुख को भी प्रभावित कर रहा है। तुर्की और अजरबैजान के साथ शैक्षणिक संबंधों में यह बदलाव भारत के मजबूत राष्ट्रीय रुख का प्रतीक है।