Breaking News

ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा का खांसी वाले मामले में कोई लेना देना नहीं है: स्वास्थ्य मंत्री

India Ahead Now | Updated on: October 4, 2025 | 3:38 pm

खांसी से राहत देने के नाम पर बच्चों की ज़िंदगी पर भारी पड़ा सिरप, जांच में निकली ज़हरीली सामग्री, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो राज्यों में बिक्री पर लगाई रोक।

जयपुर (प्रियंका शर्मा)। राजस्थान में खांसी सिरप विवाद मामले में राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा का इस विवाद से कोई लिंक नहीं है। उनका मामला अलग है। बता दें कि कुछ मीडिया वाले इस मामले में ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा का नाम जोड़ रहे थे लेकिन मंत्री के इस बयान ने ना केवल उन खबरों का खण्डन कर दिया है बल्कि साफ कर दिया है कि उनका इस मामले में कोई लिंक नहीं।

बता दें कि खांसी के इलाज में इस्तेमाल होने वाला एक सिरप पीने से दो राज्यों में कई बच्चों की मौत हो गई है। प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) जैसी ज़हरीली रसायनिक सामग्री मौजूद थी। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित बैच की बिक्री पर रोक लगाई है और फार्मा कंपनियों से जवाब मांगा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अब तक 18 से ज़्यादा बच्चों की मौत सिरप पीने के बाद दर्ज की गई है। जिन बच्चों ने यह सिरप लिया, उनमें गंभीर लक्षण जैसे उल्टी, पेट दर्द, और पेशाब बंद होना देखा गया। जांच में खुलासा हुआ है कि सिरप में मानक से कई गुना अधिक विषैला तत्व मिला था, जो शरीर में पहुंचते ही किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाता है। स्थानीय प्रशासन ने फार्मा कंपनी की फैक्ट्री को सील कर दिया है और उत्पाद के नमूने परीक्षण के लिए केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDSCO) को भेजे गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है — “अगर लापरवाही साबित हुई, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी। बच्चों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” यह पहला मामला नहीं है जब खांसी के सिरप को लेकर विवाद हुआ है। 2022 में गाम्बिया में भारतीय दवा कंपनी द्वारा बने सिरप से 66 बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद WHO ने भारत में बनी कुछ दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। भारत विश्व के सबसे बड़े दवा निर्यातकों में से एक है, लेकिन हाल के वर्षों में घटिया दवाओं के मामलों से देश की साख पर असर पड़ा है।

सरकारी कार्रवाई और अलर्ट:

दो राज्यों में संदिग्ध सिरप के सभी बैच बाज़ार से हटाए गए। संबंधित फार्मा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी। केंद्र ने सभी राज्यों को “फार्मास्युटिकल क्वालिटी चेक ड्राइव” चलाने के निर्देश दिए। डॉक्टरों और फ़ार्मासिस्टों को बच्चों के लिए सिरप देने से पहले बैच नंबर और कंपनी नाम चेक करने की सलाह।

पेरेंट्स ध्यान दें:

किसी भी अनजान कंपनी का सिरप बच्चों को न दें। लेबल पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और कंपनी का नाम ज़रूर पढ़ें। किसी भी दवा के बाद बच्चे में असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल में जाएं। संदिग्ध सिरप की जानकारी निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या ड्रग कंट्रोल ऑफिस को दें।