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राजस्थान की बेटी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतह कर देश का नाम रोशन किया

CISF's Geeta Samota created history, hoisted the tricolor on Mount Everest
India Ahead Now | Updated on: May 21, 2025 | 1:21 pm
नई दिल्ली: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सब-इंस्पेक्टर गीता सामोता ने इतिहास के पन्नों में सुनहरा अध्याय जोड़ते हुए दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर तिरंगा फहराकर देश का गौरव बढ़ाया है। यह पहली बार है जब CISF की किसी महिला कर्मी ने इस दुर्गम चोटी पर फतह हासिल की है। गीता ने सोमवार को यह ऐतिहासिक चढ़ाई पूरी की, जिसकी जानकारी CISF के प्रवक्ता ने मंगलवार को साझा की। यह उपलब्धि न केवल गीता की व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह CISF और समस्त भारत के साहस, दृढ़ता और जज्बे का प्रतीक है।
राजस्थान के गांव से एवरेस्ट तक की प्रेरणादायक यात्रा
35 वर्षीय गीता सामोता राजस्थान के सीकर जिले के चाक गांव की रहने वाली हैं। उनकी कहानी साहस, लगन और मेहनत की जीवंत मिसाल है। गीता ने अपने करियर की शुरुआत एक होनहार हॉकी खिलाड़ी के रूप में की थी, लेकिन चोट के कारण उन्हें खेल से दूरी बनानी पड़ी। इसके बाद 2011 में उन्होंने CISF में शामिल होकर देश सेवा का रास्ता चुना। वर्तमान में वह उदयपुर हवाईअड्डा इकाई में तैनात हैं।
पर्वतारोहण में उनकी रुचि ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। खास बात यह है कि जब उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा, तब CISF के पास कोई पर्वतारोहण टीम नहीं थी। फिर भी, गीता ने अपने अटूट हौसले और कठिन प्रशिक्षण के दम पर असंभव को संभव कर दिखाया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल CISF बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
पर्वतारोहण में उल्लेखनीय उपलब्धियां
गीता सामोता ने 2019 में पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने उत्तराखंड के माउंट सतोपंथ (7,075 मीटर) और नेपाल के माउंट लोबुचे (6,119 मीटर) पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की पहली महिला कर्मी बनीं, जिन्होंने यह कारनामा किया। उनकी ये उपलब्धियां उनके दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम का परिणाम थीं। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई, जो हर पर्वतारोही का सपना होती है, गीता ने न केवल हासिल की, बल्कि इसके जरिए उन्होंने देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया।
देश के लिए गर्व का पल
CISF के प्रवक्ता ने गीता की इस उपलब्धि को “अदम्य साहस और हौसले की मिसाल” करार देते हुए कहा कि जब गीता एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहरा रही थीं, तब यह नजारा पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था। गीता की इस उपलब्धि ने न केवल CISF के 56 साल के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
प्रेरणा की मिसाल
गीता सामोता की यह उपलब्धि युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, अगर हौसला बुलंद हो तो हर सपना सच हो सकता है। गीता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरा देश उन्हें सलाम करता है।