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भारत में ‘चिकनगुनिया अलर्ट’ — हर साल 51 लाख लोग बन रहे हैं शिकार, बढ़ रहा संक्रमण का खतरा

India Ahead Now | Updated on: October 5, 2025 | 11:53 am

जयपुर (प्रियंका शर्मा) बदलते मौसम और मच्छरों की बढ़ती संख्या से देशभर में चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़े, विशेषज्ञ बोले — “अब ज़रूरत है जन-जागरूकता और सटीक मॉनिटरिंग की।” भारत में चिकनगुनिया का खतरा एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। स्वास्थ्य एजेंसियों के मुताबिक, देश में हर साल करीब 51 लाख लोग इस वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। मानसून के बाद बढ़ते मच्छर जनसंख्या घनत्व और शहरी इलाकों में पानी के जमाव ने संक्रमण के फैलाव को और तेज कर दिया है। कई राज्यों में हाल के हफ्तों में मामलों में 30–40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चिकनगुनिया क्या है?
चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है. इसका सबसे बड़ा प्रभाव शरीर के जोड़ों पर पड़ता है. तेज बुखार, शरीर टूटना, और खासकर जोड़ों में तेज दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं. कई मामलों में यह दर्द महीनों या सालों तक बना रह सकता है, जिससे व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर भी हो सकता है.

भारत में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
भारत की जनसंख्या, जलवायु, साफ-सफाई की स्थिति और बढ़ती शहरीकरण मच्छरों के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करती है. इसके अलावा गंदे पानी का जमा होना, कूलरों, बर्तनों और अन्य जगहों में रुका हुआ पानी, खुले कचरे और सफाई की कमी, बारिश के मौसम में बढ़ती नमी, ये सभी कारण मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी करते हैं और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को फैलने का मौका देते हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इसे रोका नहीं गया, तो आने वाले सालों में यह बीमारी ऐसे इलाकों में भी फैल सकती है, जहां अब तक यह मौजूद नहीं थी. शोध में बताया गया है कि आने वाले समय में दुनिया भर में चिकनगुनिया के संक्रमित लोगों की संख्या 3.49 करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें भारत में 1.21 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं.

चिकनगुनिया से सेफ रहने के उपाय
1. मच्छरों से बचाव
घर के अंदर और बाहर पानी न जमने दें — गमले, कूलर, टायर, बाल्टी आदि नियमित साफ करें।
मच्छरदानी का उपयोग करें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
मच्छर भगाने वाले स्प्रे या क्रीम (रेपेलेंट) का प्रयोग दिन और शाम दोनों समय करें।

2. सफाई और सावधानी
आसपास का इलाका साफ रखें — नालियों और गड्ढों में पानी जमा न होने दें।
घर के कोनों में कीटनाशक (लार्विसाइड) डालें।
सार्वजनिक क्षेत्रों में सफाई अभियान में भाग लें।

3. व्यक्तिगत सुरक्षा
हल्के रंग के कपड़े पहनें जो पूरे शरीर को ढकें।
बच्चों को बाहर खेलने से पहले रेपेलेंट लोशन लगाएं।
घर में एसी या मच्छरदानी के साथ सोएं।

4. शरीर को मजबूत रखें
पर्याप्त पानी पिएं और हेल्दी डाइट लें।
बुखार या जोड़ों में दर्द महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, खुद दवा न लें।

5. क्या न करें
खुले में रखे पानी के बर्तन ढककर रखें।
कूलर का पानी हर 2–3 दिन में बदलें।
बुखार होने पर ब्रूफेन जैसी दवाएँ बिना सलाह के न लें (यह शरीर पर असर डाल सकती हैं)।