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पोखरण-2 से कूटनीतिक जीत तक: भारत की ताकत का विश्व को संदेश, भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर विशेष

India Ahead Now | Updated on: May 15, 2025 | 9:56 pm
जयपुर, 15 मई 2025: भारत ने अपनी ताकत और संकल्प का परिचय तब दिया जब मई 1998 में राजस्थान की पावन भूमि पर पोखरण-2 परमाणु परीक्षण किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को अपनी सामरिक शक्ति का लोहा मनवाया। आज, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उनके स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को याद किया।
पोखरण-2: भारत की ताकत का प्रतीक
मई 1998 में पोखरण-2 ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया। इस समय जब दुनिया भारत की ताकत को सलाम कर रही थी, पहलगाम में छेड़खानी की घटना ने भारत की अस्मिता को ललकारा। अटल जी ने बिहार की धरती से दुनिया को कड़ा संदेश दिया, और भारत ने न केवल सैन्य ताकत से जवाब दिया, बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी ऐतिहासिक जीत हासिल की।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने संबोधन में कहा, “पोखरण-2 भारत की अटूट इच्छाशक्ति का प्रतीक था। अटल जी और भैरोंसिंह शेखावत जी के नेतृत्व में भारत ने दिखाया कि हम अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे।”
भारत की सैन्य और कूटनीतिक विजय
पहलगाम की घटना के बाद भारत ने अपनी सैन्य शक्ति का परिचय दिया। ‘आकाश’ मिसाइल और ‘ब्रह्मोस’ जैसे हथियारों ने दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भारतीय सेना की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा, “हमारी सेना ने न केवल युद्ध के मैदान में जीत हासिल की, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कूटनीतिक मोर्चे पर भी अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की।”
भारत ने Indus Water Treaty को रोककर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और अस्थिरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धनखड़ ने कहा, “जब तक हालात भारत की दृष्टि से सामान्य नहीं होंगे, इस पर कोई विचार नहीं होगा। यह भारत की नई विदेश नीति और आत्मविश्वास का परिचायक है।”
भैरोंसिंह शेखावत: राजस्थान के बट वृक्ष
जयपुर में भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भैरोंसिंह शेखावत मेमोरियल लाइब्रेरी का लोकार्पण किया और मूल संविधान की एक प्रति भेंट की, जिसमें संविधान समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। इस प्रति को लाइब्रेरी में प्रदर्शित किया जाएगा।
धनखड़ ने शेखावत को याद करते हुए कहा, “वह राजनीति के अजातशत्रु थे। शेखावत जी वो बट वृक्ष थे, जिनकी छांव में राजस्थान पनपा। उनकी पुस्तकों के प्रति प्रेम और राजनीति में मूल्यों ने हमें प्रेरित किया। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह शेखावत जी की देन है।”
भारत की सेना और कूटनीति की तारीफ
उपराष्ट्रपति ने भारतीय सेना के साहस की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमारी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर दुश्मन को मारा। अब समय आ गया है जब आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक जीत को भी रेखांकित किया, जिसने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया।
भैरोंसिंह शेखावत का योगदान
शेखावत ने न केवल राजस्थान को विकास के पथ पर अग्रसर किया, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। धनखड़ ने कहा, “शेखावत जी ने राजनीति में यह स्थापित किया कि कोई शत्रु नहीं होता। उनका जीवन और कार्य हम सभी के लिए प्रेरणा है।”
भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर पोखरण-2 की गौरव गाथा और भारत की सैन्य-कूटनीतिक ताकत को याद करना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। यह दिन हमें शेखावत जी के योगदान और भारत की अटूट संकल्पशक्ति की याद दिलाता है।
अधिक जानकारी के लिए भैरोंसिंह शेखावत मेमोरियल लाइब्रेरी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।