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मालदा में SIR विवाद: न्यायिक अधिकारियों का 9 घंटे का बंधक संकट, नेशनल हाईवे जाम और सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार

India Ahead Now | Updated on: April 2, 2026 | 5:05 pm
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक में बुधवार (1 अप्रैल 2026) को हुई घटना ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने वोटर लिस्ट से नाम कटने के विरोध में सात न्यायिक अधिकारियों (जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं) को लगभग 9 घंटे तक BDO कार्यालय में घेर लिया। इस दौरान नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया गया, जिससे उत्तरी और दक्षिणी बंगाल का संपर्क कट गया।
घटना का क्रम
  • प्रदर्शनकारी पहले न्यायिक अधिकारियों से मिलना चाहते थे, लेकिन मांग ठुकरा दी गई।
  • शाम करीब 4 बजे भीड़ ने BDO कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया। अधिकारियों को अंदर पानी और खाना तक नहीं दिया गया।
  • प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। वे नाम वापस शामिल करने की मांग कर रहे थे।
  • रात भर तनाव बना रहा। कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद आधी रात के बाद पुलिस और केंद्रीय बलों ने अधिकारियों को सुरक्षित निकाला। निकासी के दौरान पथराव हुआ और पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए।

अगले दिन (गुरुवार) भी मालदा में विरोध जारी रहा। सुबह से ओल्ड मालदा के मंगलबाड़ी इलाके में NH-12 को जाम किया गया। पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और एक पुलिस ड्राइवर घायल हो गया। माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और कार्रवाई
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा:

  • “पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ राज्य है।”
  • यह घटना “सोची-समझी और मकसदपूर्ण” लगती है, जो न्यायपालिका पर हमला है।
  • मुख्य सचिव, DGP, मालदा के डीएम और एसपी को नोटिस जारी कर पूछा गया कि क्यों उनके खिलाफ कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने पूछा कि रात 11 बजे तक कलेक्टर मौके पर क्यों नहीं पहुंचा? एक 5 साल के बच्चे को भी खाना-पानी नहीं दिया गया।
  • कोर्ट ने कहा कि राज्य प्रशासन में “पूर्ण विफलता” है और कानून-व्यवस्था का पूर्ण breakdown हुआ है।
  • चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि SIR प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात किए जाएं।
  • घटना की जांच CBI या NIA से कराने का विकल्प दिया गया, जिस पर कोर्ट नजर रखेगा।

कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिली रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी:
  • TMC नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने कुछ तत्वों को उकसाया है ताकि अशांति फैले। उन्होंने कहा कि कानून अपने हाथ में लेना गलत है, लेकिन जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कौन लोग थे, लेकिन लोग SIR से नाराज हैं। “मेरे पास कोई पावर नहीं बची, सारी शक्तियां छीन ली गईं।” उन्होंने इसे बीजेपी की साजिश बताया और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। ममता ने मालदा-मुर्शिदाबाद के लोगों से अपील की कि वे उकसावे में न आएं, खासकर शुक्रवार (जुम्मे) के दिन। उन्होंने शांति से चुनाव लड़ने की बात कही और हिंदू-मुस्लिम एकता की अपील की।
बीजेपी:
अमित मालवीय ने कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। BDO कार्यालय घिरा रहा, NH-12 जाम रहा और अधिकारी फंसे रहे। उन्होंने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी, लेकिन प्रशासन ने समय पर हस्तक्षेप नहीं किया।
पृष्ठभूमि
SIR प्रक्रिया के तहत बंगाल में लाखों नामों की समीक्षा हो रही है। कई जगहों पर “अंडर एडजुडिकेशन” या डिलीशन को लेकर विवाद है। TMC ने पहले भी चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष इसे पारदर्शी प्रक्रिया बताता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब स्थायी रूप से मताधिकार छीनना नहीं है।यह घटना बंगाल की सियासी उबाल को और बढ़ा रही है, जहां TMC और BJP के बीच टकराव पहले से तीखा है। कोर्ट की निगरानी और केंद्रीय बलों की तैनाती अब SIR प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।