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हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (HJU) के तीसरे दीक्षांत समारोह में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा: “बेइज्जती करके इज्जत देने का शुक्रिया”, एक विवादास्पद लेकिन यादगार समापन

India Ahead Now | Updated on: March 26, 2026 | 4:46 pm

जयपुर, 26 मार्च 2026 | राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) की भव्य ऑडिटोरियम में बुधवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि रहे, जबकि उच्च शिक्षा मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह की शुरुआत गरिमापूर्ण माहौल में हुई, लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, छात्रों के मन में पल रही नाराजगी ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

पिछले समारोहों से अलग प्रोटोकॉल
विश्वविद्यालय के पहले और दूसरे दीक्षांत समारोह में परंपरा रही थी कि सभी छात्रों को मंच पर बुलाकर राज्यपाल स्वयं डिग्री प्रदान करते थे। अभिभावकों (पेरेंट्स) को भी आमंत्रित किया जाता था और पूरा परिवार इस गौरवपूर्ण क्षण का हिस्सा बनता था। लेकिन इस बार प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाई। केवल स्वर्ण पदक विजेता (गोल्ड मेडलिस्ट) छात्रों को मंच पर बुलाया गया। राज्यपाल ने 12 स्वर्ण पदक वितरित किए, लेकिन 259 छात्रों को मंच पर बुलाने की बजाय कार्यक्रम को समाप्ति की ओर ले जाया गया।अभिभावक अपने बच्चों के साथ दूर-दूर से आए थे। उन्होंने इस प्रोटोकॉल को अपमानजनक माना। छात्रों ने बताया, “हमने न कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े का विरोध किया, न ही उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा का। हमारा विरोध केवल विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पांडेय के प्रति था, जिन्होंने इस बार की व्यवस्था में छात्रों और उनके परिवारों की भावनाओं को तवज्जो नहीं दी।”

विरोध की चिंगारी भड़की
जैसे ही कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा हुई, गुस्साए छात्रों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। RIC के हॉल में “विरोध प्रदर्शन” की गूंज उठी। छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे डिग्री लेने से इनकार नहीं कर रहे थे, बल्कि सम्मानजनक तरीके से सभी को मंच पर बुलाकर डिग्री देने की मांग कर रहे थे, जैसा कि पिछले दो समारोहों में हुआ था।

विरोध के दौरान छात्रों ने उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा को रोका और अपनी शिकायत बताई। बैरवा ने छात्रों की बात ध्यान से सुनी और तुरंत मंच पर वापस लौट आए। उन्होंने बाकी बचे छात्रों को डिग्रियां वितरित करने का फैसला लिया। माहौल थोड़ा शांत हुआ, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार था।

छात्रा का तीखा तंज: वायरल वीडियो
समारोह का सबसे चर्चित पल तब आया जब निवर्तमान उपाध्यक्ष सारा इस्माइल (Sara Ismail) मंच पर डिग्री लेने पहुंचीं। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा से डिग्री लेते हुए उन्होंने साफ-साफ कहा:“HJU का बेइज्जती करके इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।”
यह तीखा और व्यंग्यात्मक बयान पूरे हॉल को स्तब्ध कर गया। छात्रा की यह टिप्पणी तुरंत वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई। कई लोगों ने इसे छात्रों की पीड़ा का प्रतीक बताया, जबकि कुछ ने इसे समारोह की गरिमा के खिलाफ माना।छात्रों ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका गुस्सा प्रशासन की “भेदभावपूर्ण” व्यवस्था के खिलाफ था, जिसमें केवल कुछ चुनिंदा छात्रों को विशेष सम्मान दिया गया और बाकी को उपेक्षित महसूस कराया गया। पेरेंट्स के साथ आए छात्र-छात्राओं के लिए यह क्षण और भी कड़वा हो गया, क्योंकि वे अपने बच्चों का यह गौरवपूर्ण पल परिवार के साथ मनाना चाहते थे।

विश्वविद्यालय का पक्ष और समापन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पांडेय की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में छात्रों को पत्रकारिता की गरिमा, स्वतंत्रता संग्राम में मीडिया की भूमिका और ज्ञान का समाज हित में उपयोग करने की सलाह दी। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भी स्नातकों और स्नातकोत्तरो को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह में कुल 271 छात्रों (2024 और 2025 बैच) को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और दो पीएचडी छात्र शामिल थे। 12 छात्रों को स्वर्ण पदक और 35 को मेरिट सर्टिफिकेट दिए गए।

छात्रों की आवाज़: एक सबक
यह घटना केवल एक दीक्षांत समारोह का विवाद नहीं, बल्कि छात्रों की भावनाओं, सम्मान और समान व्यवहार की मांग का प्रतीक बन गई है। पत्रकारिता और जनसंचार जैसे क्षेत्र से जुड़े छात्र, जो समाज में सत्य और न्याय की आवाज़ बनने वाले हैं, खुद अपने विश्वविद्यालय में “इज्जत” की लड़ाई लड़ते नजर आए। HJU राजस्थान का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जो मीडिया शिक्षा पर विशेष ध्यान देता है। ऐसे में प्रशासन को छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराई जाए।

तीसरा दीक्षांत समारोह HJU के लिए गर्व और विवाद दोनों का दिन साबित हुआ। छात्रों ने अपनी आवाज़ बुलंद की और प्रशासन को मजबूर किया कि वह उनकी मांगों पर ध्यान दे। सारा इस्माइल का वह वाक्य अब इस समारोह का सबसे यादगार और चर्चित हिस्सा बन गया है, “बेइज्जती करके इज्जत देने का शुक्रिया”।यह घटना उन हजारों छात्रों के लिए एक संदेश है जो सपनों के साथ इस विश्वविद्यालय में दाखिला लेते हैं | शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, सम्मान भी मांगती है