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जयपुर फिर दहला आग से: मोखमपुरा हादसे ने दिलाई भांकरोटा अग्निकांड की याद

India Ahead Now | Updated on: October 8, 2025 | 5:03 pm

जयपुर (प्रिंयका शर्मा)| राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास एक बार फिर आग का तांडव देखने को मिला। मंगलवार देर रात जयपुर-अजमेर हाईवे पर मोखमपुरा के पास हुए भयावह हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। एलपीजी सिलेंडर से भरे एक ट्रक को पीछे से आते केमिकल टैंकर ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे भयानक आग लग गई। कुछ ही मिनटों में एक-एक करके करीब 200 सिलेंडर फट गए, और कई किलोमीटर तक धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं।

कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा रात करीब 11:45 बजे हुआ जब हाईवे पर एक एलपीजी सिलेंडर लदा ट्रक मोखमपुरा के पास धीमी गति से जा रहा था। पीछे से आ रहे एक केमिकल टैंकर ने तेज रफ्तार में टक्कर मार दी। जानकारी के अनुसार केमिकल से भरा टैंकर गुजरात से जयपुर की ओर आ रहा था। महावीर ढाबे के नजदीक आरटीओ चेकिंग के डर से टैंकर ड्राइवर रामराज ने उसे ढाबे की तरफ मोड़ दिया। यहां पहले से खड़े एलपीजी ट्रक से टैंकर टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी टैंकर के केबिन में आग लग गई थी। इसी चिंगारी से एलपीजी सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया और लगातार सिलेंडर फटने से स्थिति विस्फोटक बन गई। दमकल विभाग की करीब 12 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

जनहानि और नुकसान
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में दो लोगों की मौत हुई है जबकि चार गंभीर रूप से झुलस गए। आसपास के गांवों में भी आग की लपटें और धमाके सुनाई दे रहे थे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत इलाके को खाली कराया और हाईवे को कई घंटे तक बंद रखना पड़ा।

भांकरोटा अग्निकांड की याद फिर ताज़ा
यह हादसा पिछले साल फरवरी 2024 में जयपुर के भांकरोटा थाना इलाके में अजमेर रोड पर हुए सीएनजी गैस टैंकर ब्लास्ट की याद दिलाता है। तब एक सीएनजी टैंकर पलटने के बाद उसमें आग लग गई थी, जिससे पास खड़ी गाड़ियों और दुकानों में भी आग फैल गई थी। उस घटना में भी कई लोग झुलस गए थे और करोड़ों का नुकसान हुआ था। उसके बाद प्रशासन ने दावा किया था कि खतरनाक रसायन और गैस ढोने वाले वाहनों की सुरक्षा जांच सख्ती से होगी, लेकिन मोखमपुरा हादसे ने उन दावों की पोल खोल दी है।

विशेषज्ञों की राय: “सुरक्षा नियमों की अनदेखी घातक”
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी और केमिकल टैंकरों को एक ही मार्ग पर चलने की अनुमति देना अत्यंत जोखिमभरा है।

रात के समय भारी और ज्वलनशील पदार्थों वाले वाहनों के लिए अलग मार्ग या समय सीमा तय की जानी चाहिए।

ड्राइवरों को नियमित सेफ्टी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए और वाहनों की तकनीकी फिटनेस जांच सख्ती से होनी चाहिए।

जयपुर फायर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि “मोखमपुरा हादसा पूरी तरह मानवीय लापरवाही का नतीजा है। सुरक्षा मानकों का पालन न होने से छोटे हादसे बड़े विस्फोट में बदल जाते हैं।”

सीख: हादसे रोकने के लिए सख्ती जरूरी
भांकरोटा (2024) और मोखमपुरा (2025) दोनों हादसे साफ संकेत देते हैं कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी और मानवीय लापरवाही मिलकर किसी भी वक्त बड़ा हादसा कर सकती है। अगर प्रशासन ने अब भी सख्त कदम नहीं उठाए तो जयपुर-अजमेर हाईवे “गैस बम हाईवे” में तब्दील हो सकता है। इन हादसों से सबक लेकर अब ज़रूरत है व्यवस्थित निगरानी, तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही तय करने की।