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करवाचौथ पर इस विधि से करें व्रत-पूजन का संकल्प, दूर होंगी पति के जीवन की सभी बाधाएं

India Ahead Now | Updated on: October 7, 2025 | 2:37 pm

जयपुर (ऋतुश्री पथरिया)
शास्त्रों के अनुसार सही संकल्प और विधिपूर्वक पूजा से करवाचौथ का व्रत होता है सफल, मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर वर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि यदि करवाचौथ के दिन विधिपूर्वक संकल्प लेकर व्रत और पूजन किया जाए, तो पति के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

संकल्प करते समय महिलाओं को अपने सामने जल से भरा कलश, दीपक, अक्षत, रोली और फूल रखना चाहिए। संकल्प के समय देवी पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करते हुए कहना चाहिए – “मम सौभाग्यसिद्ध्यर्थं करिष्ये करकचतुर्थीव्रतम्।” इस संकल्प के साथ व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। इसके बाद कथा सुनना, माता गौरी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य अर्पित कर पति के हाथ से जल ग्रहण करने पर यह व्रत पूर्ण होता है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति के जीवन की सभी संकटों से रक्षा होती है।

पंडितों के अनुसार, करवाचौथ के इस व्रत से न केवल सौभाग्य की वृद्धि होती है बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण भी गहराता है। इसलिए इस बार करवाचौथ पर श्रद्धा और संकल्पपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का संचार होगा।