जयपुर, 13 सितंबर 2025: कांग्रेस के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान ने देशभर में जोर पकड़ लिया है। पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर तीखी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोटों की चोरी से लोकतंत्र खतरे में है। गहलोत ने हर गांव तक इस संदेश को पहुंचाने का आह्वान किया है, ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।
गहलोत ने कहा, “वोट चोर गद्दी छोड़ हर गांव तक बात पहुंच गई। हर गांव तक बात पहुंच गई कि भई वोटों की चोरी हो रही है इसलिए चुनाव जीते जा रहे हैं। ये बहुत खतरनाक है, डेमोक्रेसी के लिए खतरनाक है। डेमोक्रेसी में सबसे पहला काम होता है चुनाव आयोग का वो निष्पक्ष चुनाव करवाए। कोई पार्टी जीते, कोई उम्मीदवार जीते, अलग बात है।”
उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये पर निशाना साधते हुए बताया कि राहुल गांधी ने मशीन रीडेबल डेटा मांगा था, लेकिन आयोग ने सहयोग नहीं किया। “फिर जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, राहुल गांधी जी ने एक क्वेश्चन रेज़ किया कि भई आप हमें मशीन रीडेबल दे नहीं रहे हो। आप वर्ना हम फटाफट इस काम को कर सकते थे। तो आप जो है हमें मजबूरी में छह महीने लगे। छह महीने में हमने नतीजे पर पहुंचे हम लोग, लगभग एक लाख फर्जी वोट निकले। अगर इलेक्शन कमीशन जांच करवा देता उस वक्त, तो उसमें कितने वोट कहां गड़बड़ हुई, कहां नहीं हुई, स्पष्ट हो जाता।”
गहलोत ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि आजादी के तुरंत बाद, जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ और लाखों लोग विस्थापित हुए, तब भी चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव कराए। “और कायदा ये होता आजतक। आजादी के वक्त में जब आपको मालूम है हिंदुस्तान पाकिस्तान बना था, तब कितने लोग हिन्दुस्तान आए होंगे, कितने लोग पाकिस्तान गए होंगे। तब भी इलेक्शन कमीशन ने चुनाव करवा दिए, जबकि शिक्षा नहीं थी। वक्त में लोग चिन्ह को नहीं समझते थे, पढ़ नहीं सकते थे। उस से लगाकर आज तक का इतिहास है, चुनाव लगातार हो रहे हैं।”
उन्होंने चुनाव आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की गलतियों को जिम्मेदार ठहराया। “चुनाव आयोग के जो चेयरमैन हैं न और उनके जो मेंबर हैं, उनकी गलतियों से, उनके व्यवहार से ये स्थिति बनी है देश के अंदर। और ये इतना सीरियस प्वाइंट बन गया। पहले शक था ईवीएम पर देशवासियों को, क्योंकि अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान सब जगह वोट बैलेट से होता है। पहले वहां भी मशीनें थीं, वो शक था ही पहले से ही। सुप्रीम कोर्ट तक लोग गए तो उन्होंने कहा वीवीपेट लगा दो। ये चल रहा था।”
हाल के वोटर लिस्ट सर्वे पर बोलते हुए गहलोत ने आयोग की देरी पर सवाल उठाए। “अब ये जो नया जो सर्वे हुआ है इधर, आप दो महीने पहले चुनाव के आप एसआईआर करवा रहे हो। ये डेढ़ साल पहले होता अगर आपको इंटेंसिव ये करना था। आपको ये सर्वे वोटर लिस्ट का कम से कम एक डेढ़ साल पहले शुरू होता, इतना बड़ा काम ये है। आपने दो महीने पहले, डेढ़ महीने पहले ये शुरू कर दिया, असंभव है। कोई गलती बताए भी, उसकी अपील भी होती है। प्रोसेस पूरा होता है उसमें, आप वो काम कर नहीं सकते। कब तो अपील करोगे, कब क्या करोगे, कुछ पता नहीं पड़ता है। ऐसी स्थिति में चलता है तो ऐसी स्थिति जब हम लोग इश्यू प्रारंभ हुआ है तो उसके अंदर तमाम तरह की गड़बड़ियां पैदा हुईं। शक, शुभा पैदा हुआ पूरे देश के अंदर। और पता नहीं एसआईआर में क्या क्या करेंगे। 65 लाख वोट काट दिए हैं। कब तो उनकी अपील हो, कब अपील में सुनवाई हो। तो डेढ़ महीने पहले चुनाव में एसआईआर करवाते हैं क्या? ये बेवकूफियों से सब कुछ हो रहा है।”
गहलोत ने कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को मीटिंग करने और लोगों से साइन करवाने के निर्देश दिए हैं। “इसलिए राहुल गांधी जी ने खड़गे साहब ने कहा है प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को आप तमाम लोगों से मीटिंग करो और आप सबसे साइन करवाओ कि वोट की चोरी किस प्रकार हो रही है। और अगर वोट की चोरी होगी, निष्पक्ष चुनाव कभी हो नहीं पाएंगे। निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे तो डेमोक्रेसी को खतरा है देश के अंदर। मुख्य बात ये है।”
अंत में, उन्होंने हर नागरिक से अपील की कि लोकतंत्र बचाना कर्तव्य है। “और डेमोक्रेसी को बचाना हर नागरिक का अधिकार है, क्योंकि अधिकार नहीं है, कर्तव्य है। अगर वोट चोरी नहीं रुकी, निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए चुनाव आयोग के, तो आप बताइए वोट का अधिकार चला जाएगा। आम आदमी की जिम्मेदारी है अपने वोट के अधिकार को बचाने के लिए इस अभियान में हिस्सेदारी करे और वोट चोरी जो एक कैंपेन चल रहा है, वो कामयाब करे।”
यह बयान राजस्थान में चल रहे ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के बीच आया है, जिसमें 6 सितंबर को प्रदेशव्यापी रैली का आयोजन हो चुका है। प्रियंका गांधी सहित कई नेता इसमें शामिल हुए। गहलोत का यह आह्वान कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह भर रहा है, जो बूथ स्तर तक इस मुद्दे को पहुंचा रहे हैं।