जयपुर। राजधानी जयपुर में खुद को साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर दो ई-मित्र संचालकों से रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने पुलिस अधिकारी होने का दावा करते हुए दोनों युवकों को साइबर क्राइम लिस्ट में नाम होने का डर दिखाया और पैसे नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी। मामले का खुलासा होने के बाद कालवाड़ थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। यह मामला अब Fake Police Officer बनकर ठगी और वसूली के प्रयास के रूप में जांच के दायरे में है।
पुलिस के अनुसार दौसा जिले के बसवा निवासी राहुल योगी ने मामला दर्ज कराया है। राहुल कालवाड़ क्षेत्र में ई-मित्र राजस्थान ग्रामीण कियोस्क संचालित करता है। उसके परिचित राकेश की भी पास में ही ई-मित्र कियोस्क है। शिकायत में बताया गया है कि पिछले कुछ दिनों से प्रवीण नाम का एक व्यक्ति लगातार उनके ई-मित्र केंद्र पर आ-जा रहा था। वह खुद को साइबर क्राइम ब्रांच जयपुर का अधिकारी बताता था। इस Fake Police Officer ने विश्वास जीतने के लिए कथित पुलिस पहचान पत्र भी दिखाया।
राहुल और राकेश ने बताया कि लगातार आने-जाने के कारण उनकी आरोपी से पहचान हो गई थी। उन्हें लगा कि वह वास्तव में पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ व्यक्ति है। इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए Fake Police Officer ने दोनों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की।

पीड़ितों के अनुसार बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे आरोपी ई-मित्र केंद्र पर पहुंचा और राकेश को भी बुलाने के लिए कहा। दोनों के एक साथ आने के बाद उसने एक कथित साइबर रिपोर्ट लिस्ट दिखाई। आरोपी ने दावा किया कि इस सूची में राहुल और राकेश दोनों के नाम शामिल हैं। इसके बाद Fake Police Officer ने कहा कि यदि वे अपना नाम सूची से हटवाना चाहते हैं तो उन्हें पैसे देने होंगे।
शिकायत में बताया गया है कि आरोपी ने राहुल से 18 हजार रुपये और राकेश से 60 हजार रुपये की मांग की। उसने दोनों को डराते हुए कहा कि यदि रकम नहीं दी गई तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। Fake Police Officer की इस धमकी से दोनों कुछ समय के लिए घबरा गए, लेकिन बाद में उन्हें उसके व्यवहार पर शक होने लगा।
राहुल और राकेश ने जब अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो पता चला कि आरोपी किसी भी सरकारी एजेंसी या साइबर क्राइम शाखा से जुड़ा नहीं है। जांच में सामने आया कि वह केवल Fake Police Officer बनकर लोगों को डरा रहा था। इसके बाद दोनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क करने का निर्णय लिया।
शुक्रवार को राहुल अपने परिचित राकेश के साथ कालवाड़ थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि Fake Police Officer बनकर लोगों से पैसे मांगना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने साइबर क्राइम का नाम लेकर लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उसने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बनाया है। यदि ऐसा पाया जाता है तो Fake Police Officer के खिलाफ धोखाधड़ी और वसूली से संबंधित अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के पुलिस अधिकारी होने के दावे पर आंख बंद करके विश्वास न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिसकर्मी बताकर पैसे मांगता है या धमकी देता है, तो उसकी जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को दें। कई बार Fake Police Officer बनकर ठग लोगों को डराकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
कालवाड़ थाना पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। उसके द्वारा दिखाई गई कथित पुलिस आईडी और साइबर क्राइम लिस्ट की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल दो ई-मित्र संचालकों तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए Fake Police Officer के नेटवर्क और गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने ई-मित्र संचालकों और आम लोगों को सतर्क कर दिया है। पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे Fake Police Officer बनकर लोगों को ठगने वाले आरोपियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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