जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कृषि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे अवैध गोदाम का पर्दाफाश किया है, जहां Fake Fertilizer बनाने और उसके भंडारण की आशंका जताई जा रही है। सीकर रोड स्थित रामलियावाला क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध उर्वरक, औद्योगिक नमक और अन्य कच्चा माल बरामद किया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह सामग्री Fake Fertilizer तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।
कृषि विभाग की शिकायत पर हरमाड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी बरामद सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसानों को Fake Fertilizer बेचकर धोखा तो नहीं दिया जा रहा था।
कृषि अधिकारी सावर मल यादव के अनुसार 29 मई को प्राप्त सूचना के आधार पर टीम ने गोदाम पर छापा मारा। जांच के दौरान यह देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए कि गोदाम के बाहर किसी भी कंपनी या फर्म का बोर्ड नहीं लगा था। प्रारंभिक जांच में ही Fake Fertilizer से जुड़े अवैध कारोबार की आशंका मजबूत हो गई।
गोदाम के अंदर बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री रखी हुई मिली। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह Fake Fertilizer बाजार तक पहुंच जाती तो हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।

छापेमारी के दौरान तीन कट्टे संदिग्ध डीएपी, एक कट्टा संदिग्ध एमओपी, 750 कट्टे औद्योगिक नमक, 867 कट्टे दानेदार कच्चा पदार्थ और 56 कट्टे साबुन कण बरामद किए गए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सामग्री का उपयोग Fake Fertilizer तैयार करने में किया जा सकता है।
जांच अधिकारियों के अनुसार बरामद सामग्री की मात्रा यह संकेत देती है कि यहां बड़े स्तर पर Fake Fertilizer तैयार करने या उसके भंडारण का काम चल रहा था। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह उत्पाद किसानों तक पहुंच सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि Fake Fertilizer का उपयोग फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ फसल उत्पादन में भी भारी गिरावट आ सकती है। कई मामलों में Fake Fertilizer फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर देती है, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की जानकारी तुरंत विभाग को दें।
जांच के दौरान गोदाम संचालक नरेंद्र मीणा से लाइसेंस और अन्य दस्तावेज मांगे गए। उसने खुद को गोदाम का मुनीम बताते हुए मालिक का नाम निखिल शर्मा बताया। अधिकारियों ने जब निखिल शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।
गोदाम में मिले दस्तावेजों में गोबर खाद का भंडारण दर्शाया गया था, लेकिन मौके पर मिली सामग्री और परिस्थितियों ने Fake Fertilizer से जुड़े संदेह को और मजबूत कर दिया। इसी आधार पर अधिकारियों ने गोदाम को सीज कर दिया।
हरमाड़ा थाना पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि Fake Fertilizer का यह कारोबार कब से चल रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस Fake Fertilizer की सप्लाई राजस्थान के अन्य जिलों या पड़ोसी राज्यों में भी की जा रही थी।
फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में Fake Fertilizer बनाने और बेचने की पुष्टि होती है तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को किसानों के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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