जयपुर के Jantar Mantar में आज होगा पारंपरिक वायु परीक्षण

India Ahead Now | Updated on: July 29, 2026 | 1:20 pm

जयपुर के Jantar Mantar में आज होगा पारंपरिक वायु परीक्षण

ध्वज पूजन के बाद घोषित होगा मानसून का पारंपरिक पूर्वानुमान

जयपुर: विश्व धरोहर Jantar Mantar एक बार फिर अपनी सदियों पुरानी वैज्ञानिक और पारंपरिक परंपरा का साक्षी बनने जा रहा है। आषाढ़ी वायु धारणी पूर्णिमा के अवसर पर आज, 29 जुलाई की शाम Jantar Mantar परिसर में पारंपरिक वायु परीक्षण किया जाएगा। इस विशेष आयोजन के दौरान ध्वज पूजन के बाद वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य और विद्वान वायु की दिशा, गति तथा अन्य प्राकृतिक संकेतों का गहन अध्ययन करेंगे। इन संकेतों के आधार पर जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान होने वाली वर्षा का पारंपरिक पूर्वानुमान घोषित किया जाएगा।

हर वर्ष आयोजित होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय खगोल विज्ञान और ज्योतिषीय परंपराओं से जुड़ी एक प्राचीन वैज्ञानिक पद्धति भी माना जाता है। आधुनिक मौसम विज्ञान के दौर में भी Jantar Mantar का यह पारंपरिक वायु परीक्षण लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

किसानों और आम लोगों की रहती है खास नजर

पिछले चार वर्षों से Jantar Mantar में लगातार इस पारंपरिक वायु परीक्षण का आयोजन किया जा रहा है। इस पूर्वानुमान का इंतजार केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि किसान भी बेसब्री से करते हैं। खेती पूरी तरह मौसम और बारिश पर निर्भर होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इस पारंपरिक भविष्यवाणी को विशेष महत्व दिया जाता है।

किसानों का मानना है कि यदि समय पर और पर्याप्त वर्षा का संकेत मिलता है तो वे अपनी फसलों की बुवाई, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों की बेहतर योजना बना सकते हैं। यही कारण है कि हर साल इस आयोजन के बाद जारी होने वाले पारंपरिक पूर्वानुमान पर लोगों की खास नजर रहती है।

ध्वज पूजन से होगी शुरुआत

आषाढ़ी वायु धारणी पूर्णिमा के अवसर पर सबसे पहले Jantar Mantar में विधि-विधान से ध्वज पूजन किया जाएगा। इसके बाद शास्त्रों में वर्णित परंपरागत विधियों के अनुसार वायु परीक्षण प्रारंभ होगा।

इस दौरान विशेषज्ञ वायु की दिशा, उसकी गति, वातावरण में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तन तथा अन्य प्राकृतिक संकेतों का बारीकी से अवलोकन करेंगे। इन संकेतों के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि आने वाले दिनों में जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की स्थिति कैसी रह सकती है, वर्षा सामान्य होगी या अधिक अथवा कम रहने की संभावना है।

प्राचीन ज्ञान और प्राकृतिक संकेतों का अनूठा संगम

Jantar Mantar में होने वाला यह वायु परीक्षण भारतीय परंपरा में प्रकृति के सूक्ष्म संकेतों को समझने की एक अनूठी विधि माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन काल में आधुनिक मौसम विज्ञान के संसाधन उपलब्ध नहीं थे, तब प्राकृतिक संकेतों, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और वायु की दिशा के आधार पर मौसम का अनुमान लगाया जाता था।

इसी परंपरा को आज भी Jantar Mantar में जीवित रखा गया है। यह आयोजन भारतीय वैज्ञानिक विरासत, खगोल विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस प्रक्रिया में विशेष रुचि दिखाते हैं।

आधुनिक तकनीक के बीच कायम है परंपरा

आज मौसम विभाग अत्याधुनिक सैटेलाइट, रडार और सुपर कंप्यूटर की सहायता से मौसम का पूर्वानुमान जारी करता है। इसके बावजूद Jantar Mantar का पारंपरिक वायु परीक्षण अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल मौसम का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रकृति के साथ मानव के संबंधों को भी दर्शाता है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस पारंपरिक प्रक्रिया को देखने और इसके परिणाम जानने के लिए उत्साहित रहते हैं।

आज शाम घोषित होगा पारंपरिक वर्षा पूर्वानुमान

आषाढ़ी वायु धारणी पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले इस विशेष वायु परीक्षण के बाद वर्ष 2026 के मानसून को लेकर पारंपरिक वर्षा पूर्वानुमान सार्वजनिक किया जाएगा। यह घोषणा जयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में संभावित बारिश की स्थिति को लेकर की जाएगी।

अब सभी की निगाहें Jantar Mantar में होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन पर टिकी हैं। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि सदियों पुरानी इस परंपरा के अनुसार इस वर्ष मानसून का मिजाज कैसा रहने वाला है और बारिश प्रदेश के लिए कितनी अनुकूल साबित होगी।

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